साईकिल के टायरों में हवा अपार 
जिससे टायर फटा बार बार 
हाथी सुषुप्तावस्था में 
जगह-जगह जमे हुए 
कभी हाथी साईकिल के ऊपर 
तो कभी साईकिल हाथी के ऊपर 
यूँही रेंगते-रेंगते 
सुदूर एक पेड़ से जा टकराए 
पत्ते गिरे 
झाड़ू ने बटोरने के बजाए फैला दिया 
दूर ही एक लालटेन भभक रहा था 
और इतने में हवा चल गयी 
चहुंओर आग लग गयी 
सभी जलकर 
वीरगति को प्राप्त हुए 
दर्शक अपने दोनों हाथों को फैलाए देखते रहे 
एक हाथ में जंग लगा हसुआ हथौड़ा और बुझा तारा था 
और एक हाथ की लकीरों को वो कोसते रहे 
फिर उन्ही हाथों से लाशों पर फूल चढ़ा आए 
यहीं इनकी घड़ी रूक गयी 
पर हवा चली नहीं थी 
चलायी गयी थी 
और इससे लगने वाली आग से 
एक 'गौमाता' भी मरी 
मरी हुई 'गौमाता' ने कइयों को मारा |
बरसों पहले 'गौमाता' के मूत्र और गोबर के सामांगी मिश्रण में
एक फूल खिला था - कमल 
जो अभी खिला तो है ही 
खिलखिला भी रहा है 
यह मेरे देश की संसदीय राजनीति का हाल है 
और जनता बेहाल है |


Comments

  1. सत्ता की भूख है राजनीति न कि जनता की सेवा।
    रचना एक जबरदस्त कटाक्ष!

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  2. सत्ता की भूख है राजनीति न कि जनता की सेवा।
    रचना एक जबरदस्त कटाक्ष!

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  3. सही कहा आपने|
    धन्यवाद

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