आदत
के अनुरूप
प्रोग्रेसिव
कंटेंट में
सवर्ण
एस्थेटिक सेंस से लबरेज
तड़कीले
भड़कीले रैपर से लिपटा
ओवरडोज़
है |
राष्ट्रवाद
के नाम पर टैगोर,गाँधी की भसड़ है
अम्बेडकर
के नाम पर सवर्ण जीभ जलती है
जिसका
उपचार नेहरूवियन दवा करती है |
भतेरे
आई आई टी,आई आई एम का नाम लेकर
सीना
चौड़ा वो करें
हमें
तो इन संस्थानों ने मानसिक तनाव के अलावा ढेर सारा गुस्सा दिया है
जिसे
हम इकठ्ठा कर रहे हैं |
नॉलेज
प्रोडक्शन के नाम पर
तुमने
संस्थानों को अपना परिवार बनाया है
जहाँ
हम नौकर हैं,माली हैं,बावर्ची हैं,धोबी हैं
और
वो सब हैं जिसकी तुम्हे जरूरत है |
तुम्हारी
ही डेमोक्रेटिक छवि चमकाने और तुम्हारा ईगो शांत रखने के नाम पर हममे से कुछ
स्टूडेंट भी हैं
पर
कहते तुम हमें संस्थानों के नाम पर स्टूल का डेंट हो
हमें
ही खा गए,पचा गए
हमारी
मेहनत को डकार गए
कक्षा
के भीतर मुँह नीचे किये छात्रों की शक्लें तुमने नहीं देखी
उनके
नाम तुम्हे नहीं याद
तुम्हे
बस याद है सत्ताईस,पंद्रह और साढ़े सात प्रतिशत के आंकड़े
जिन
तीन प्रतिशत के दम पर तुमने गुरु-शिष्य परंपरा को पाला पोसा है
तुम्हे
मालूम है कि पचासी प्रतिशत में से उनमे जाकर फ़ैल गए तो
सबसे
पहले ख़त्म होगी परंपरा
फिर
गुरु-शिष्य की लीला
तब
मेरिट नाम का प्रसाद ना तुम्हे बचा पाएगा
ना
तुम्हारे धर्मशास्त्रों को
जहाँ
विद्या पर बैठ गए थे तुम बरसों से
जिसे
तुम विद्या कहते रहे
वही
था हमारा नॉलेज हमारा प्रोडक्शन
जिसमे
मिली हुई थी तुम्हारे मेरिट नाम के प्रसाद की अशुद्धता
जिसे
तुम शुद्धता कहते हो |
विद्या
के मंदिरों में पण्डे बांचते रहते हैं मंत्र
गुरु
दक्षिणा का रूप ले चुकी है मोटी सैलरी
जनेऊ
को ढकने के लिए कुर्ते की जगह ले चुकी है पाश्चात्य देशों के ब्रांड वाली शर्ट
खड़ाऊ
की जगह है स्पोर्ट्स शू
इतनी
मॉडर्निटी में भी गुरु के लैपटॉप के वॉलपेपर में हैं सरस्वती
उसके
हटते ही मिल जाएँगे पोर्न के फोल्डर
लेकिन
ऑनलाइन आरती और ज्ञान की देवी ढकती है तुम्हारे रहस्य
क्या
पता चोरी की हुई किसी बहुजन छात्र के रिसर्च का फोल्डर भी हो भीतर
जिसको
तुम और तुम्हारे सवर्ण चेले मिलकर कहीं सुसंस्कृत शीर्षक में बदलकर एक पेपर पब्लिश
करा लो
तुम्हे
मिल जाये एप्रीशिएसन और सवर्ण चेले को फॉरेन यूनिवर्सिटी का रिकमेन्डेशन
बहुत
मक्कारी है
ओहदा
सरकारी है
तुम्हारी
समझ में ये हमारी लाचारी है
लेकिन
गुरु ये हमेशा नहीं चलेगा
जल्द
ही ख़त्म होंगे ये तुम्हारे विद्या चोरी के मंदिर
और
तुम्हारे पुजारियों को जब पकड़ कर घसीटा जाएगा खेत खलिहानों में
तब
तुम खुद बोलोगे कि इन्ही जमीनों पर की गयी हमारी मेहनत को बटोर कर तुम अपने मंदिर
की गुफा में इकठ्ठा करते थे
उस
पर सवर्ण स्त्री को बैठाकर सोचते रहे
उसे
हटाने की हिम्मत हमारे भीतर नहीं
तो
तुम्हे यह पता होना चाहिए कि
तुम्हारी
उसी देवी के शोषण की कहानी
हमें
भली भांति पता है और उसकी स्वतंत्रता भी
हमारी
स्वतंत्रता में है |
बढ़िया, लम्बे समय बाद आपको फिर से पढ़ के अच्छा लगा।
ReplyDeleteधन्यवाद।
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