तुम एक बेशकीमती खयाल सी 

मेरे जेहन से निकल गयी 

क्योंकि वक़्त पर मैंने तुम्हे 

अपनी डायरी में 

कलमबद्ध नहीं किया 


मैंने बहुत ज़ोर लगाया कि 

कुछ बिखरे हुए ही सही 

उन टुकड़ों को 

समेट कर एक पूरा खयाल बना लूँ 


लेकिन टुकड़ों को कितना भी 

जोड़ने की कोशिश की मैंने 

दरार हमेशा की लिए रह गयी 

Comments

Popular Posts