मेरी कविता की हर दो पंक्तियों के बीच
                         तुम मुझे मुस्कुराती हुई
जो देख रही हो या पूछ रही हो ?
कि—
क्या तुम्हे मेरी आँखों की भाषा और उसका व्याकरण पता है?
जवाब में मैं दो पंक्तियाँ और जोड़ देता हूँ
कि—
तुम्हारी झील रुपी आँखों के ठन्डे पानी
जिसमे मैं गोता लगा रहा हूँ
दिन-रात
और इस झील से मैं कभी निकलना भी नहीं चाहता |
पर अबकी बार तुम शरमा के आँखें मूँद लेती हो
क्या सच-मुच शरमा के ?
यही वह एकमात्र अँधेरा है जहाँ
मुझे सब-कुछ दिख रहा है और
वह सब-कुछ महसूस हो रहा है
जो-
इन आँखों ....हाँ तुम्हारी इन्ही आँखों ने
जो सब-कुछ देखा,महसूस किया है |
अकस्मात्
इस झील में बारिश होने लगती है
मूसलाधार बारिश !
मैं सोचने लगता हूँ की-
ये तो बेमौसम बरसात है
बिजली कड़क रही है चहुओर
कहीं वज्रपात हो रहा है
उफ्फ—
मैं घबरा जाता हूँ
और –
                                                 सुदूर कहीं दिखती है
                                                 मुझे एक नाव
                                                 क्या तुमने यह मेरे लिए भेजी है प्रिये ?
                                                 वो नाव बही चली आ रही है
                                                 मेरी तरफ,मानो मेरे ही लिए
                                                 ओह !
क्या तुम नाव के रूप में अवतरित हुई हो ?
उस नाव में तो चप्पू भी रखा है
क्या यह तुम्हारा हाथ है प्रिये ?
मैं नाव खे रहा हूँ या
नाव मुझे ले चल रही है कहीं ?
इसी सोच में ----
सहसा –
वह चप्पू मेरे हाथ से छूट जाता है
मैं कूद जाता हूँ उसे पकड़ने के लिए
पर वह तेजी से बहा जाता है
कहीं ये लहरों की शाजिश तो नहीं ?
मैं बहुत बेचैन
और निराश हो जाता हूँ |
और यह क्या –
तुम आँखें खोल क्यों नहीं रही हो ?
मैं पानी में खूब हाथ-पैर मारता हूँ
पानी की आवाज़
छाप-छाप ....छपा-छप
तेज़, और तेज़
उतनी ही तेज़ी से बारिश होती जाती है
मैं बहुत थक गया हूँ प्रिये
क्या तुम्हे नहीं पता की
मेरे फेफड़े कमजोर हैं ?
मेरा शरीर शिथिल पड़ता जा रहा है
फिर जब तुम आँखें खोल देती हो 
                           पर यह क्या जो मैं देख रहा हूँ ?
                           तुम्हारी नम आँखों में
                           मैं,जो यहाँ तुम्हारे सामने बैठा हूँ
                           तुम्हारी आँखों में तो मेरी लाश तैर रही है |


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