अंतर्मन की बात - १
नोट : कोष्ठक में लिखा हुआ ही वक्ता के अंतर्मन की बात है  |

अबकी बार
( अम्बानी सरकार )
अबकी बार
( अडानी सरकार )
अबकी बार
( भक्तों की सरकार )

अच्छे दिन
( आने वाले हैं – अम्बानी,अडानी के )
अच्छे दिन
( आने वाले हैं – संघ के ,हिन्दू परिषद् के )
अच्छे दिन
( और भी दूर जाने वाले हैं – आम जनता के )

भाइयों और बैनों
उपाविश
भाइयों और बैनों
चन्दन है इस देश की माटी
तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा
बच्चा बच्चा राम है |

भाइयों और बैनों
बचपन में मैं चाय बेचता था
( ऐसा आप लोगों का मानना है )

भाइयों और बैनों
मेरी माँ चूल्हे में खाना पकाती थी
( सो गिव अप एल पी जी सब्सिडी )
#GiveUpLPGSubsidy

भाइयों और बैनों
मेरे दलित भाइयों को मारने से पहले
मुझ पर हमला करो
( क्योंकि – वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति )

भाइयों और बैनों
सभी से मेरा पुराना नाता रहा है
( दंगाइयों से )

भाइयों और बैनों 
खाली भाषण देने से
कोई बड़ा नेता नहीं बन जाता
( सिवाए मेरे )

भाइयों और बैनों
मैं इस देश का प्रधानमंत्री नहीं
प्रधान सेवक हूँ
( प्रधान स्वयं सेवक )

मन की बात ---
( अच्छी बातें कर ली बहुत
अब करूँगा मंकी बात मंकी  मंकी मंकी मंकी मंकी बात )
भाइयों और बैनों
गन्ने के रस से ‘चीनी’ बनती है
भाइयों और बैनों
टिम्बर के पेड़ से फर्नीचर बनता है
भाइयों और बैनों
स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मस्तिष्क निवास करता है
मित्रों स्वस्थ्य शरीर चैये की नै चैये ?
मित्रों स्वस्थ्य मस्तिष्क चैये की नै चैये ?
 ( तो इसी बात पर दीजिये
स्वच्छ भारत सेस )

कश्मीर मुद्दे पर –
गर फिरदौस बर-रुए ज़मीं अस्त
हमी अस्तो, हमी अस्तो, हमी अस्त

वाणी को विराम देने से पहले –
भाइयों और बैनों
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
भाइयों और बैनों
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
भाइयों और बैनों
( JIO और ZEE NE(WS) दो )



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