जब आंसुओं को आँखों से बहने से रोकता हूँ
वो मन में पहुँच जाते हैं
उसे भिगोकर भारी कर देते हैं
मन फिर जल्दी सूखता नहीं
मेहराया हुआ सा रहता है

गीला और गरम !

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