एक
अल्पसंख्यक जब किसी
बहुसंख्यक
से बात कर रहा होता है
खासतौर
से उन्मादी माहौल में
उसे
कुछ कहना नहीं होता
वह
यह बताने से भी डरता है कि
वह
डरता है |
वह
नहीं बता पाता कि -
उसकी
बस्ती में पानी नही आ रहा है
रात
में बिजली की कटौती हो रही है
‘भारत
माता की जय’, ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ और
‘कटुओं
पाकिस्तान जाओ’ के नारे लगाती हुई
उन्मादी
भीड़ हर रोज़ अपनी उपस्थिति
दर्ज
करती है |
उसे
कहना बहुत कुछ होता है
पर
वह कह नही पाता
वह
यह सोचता है कि बहुसंख्यक
क्या
सुनना चाहता है
फिर
सामने वाले के मिजाज़ के अनुसार
वह
गणना करता है
इतनी
सावधानी से कि मानो
अपनी
साँसें खरीद रहा हो |
अपना
बजट देखकर
मोलभाव
करना तो दूर
वह
उन साँसों की कीमत भी नही पूछता
ऐसा
कर पाना उसके लिए लग्ज़री है |
वह
चुपचाप अपने दिल की जेब को
दुकानदार
के समक्ष खोलकर रख देता है
ऐसे
दुकानदारों को ऐसे ग्राहकों की नियत पर
हमेशा
ही संदेह रहा है |
ऐसे
में वह उसके सभी जेबों की
अमानवीय
तरीकों से तालाशी लेता है
वह
फिर यह नही देखता कि सामने
मशहूर
खान साहब हैं या उसके ही
पड़ोस
की बस्ती वाले दर्जी मियाँ
अपार
पैसों के बावजूद खान साहब
नहीं
खरीद पायें हैं ‘राष्ट्रभक्त’ का दर्जा
और
दर्जी मियाँ की कहें ही क्या
उनका
तो दोष ही यही है कि
वो
कपड़ों की जेबें सिलते हैं |
सभी
जेबों की तलाशी लेने के बाद भी
दर्जी
मियाँ पर किसी को भी यकीन नहीं है
कुछ
भक्तों का मानना है कि
मियाँ
अदृश्य जेबें सिलते हैं और
उसी
में छिपा के रखते हैं अपनी वफ़ादारी |
लोगों
का यह कहना है कि मियाँ ने
ऐसा
करना मदरसे में सीखा था
ऐसे
माहौल में तथाकथित इतने
हाईटेक
दर्जी मियाँ से
लोगों
ने कपड़े सिलवाना
बंद
कर दिया है |
अब
मियाँ जब भी सोचने बैठते हैं
तो
यही सोचते हैं कि
इस
अदृश्य जेब में छिपे चूहे ने
उनकी
असल जेब काट दी |
दर्जी
मियाँ का दर्द बस इतना है कि
इस
चूहे का क्या करें
जो
वक्त वक्त पर उनकी जेब काटता रहता है
उन्हें
पता है कि यह कोई मामूली चूहा नही है
जो
घरों में रैटकिल रखने से मर जाता है |
दर्जी
मियाँ ने ऐसा सुना है कि
यह
चूहा बहुत पहले विदेशों से यहाँ आया था
उनका
विश्वास भी इसी तर्क का जाने अनजाने
समर्थन
करता है
क्योंकि
उनको पता है कि
अगर
यह यहाँ पैदा होता
तो
अब तक जरूर बूढ़ा होकर
मर
गया होता |
दर्जी
मियाँ इस साजिश को समझने लगे हैं
कि
जरूर यहाँ के लोगों ने
ऐसी
तरकीब निकाली है
जिससे
यह कृत्रिम रूप से
हमारी
जान की कीमत पर
जिंदा
रह सके |
दर्जी
मियाँ हर रात
जब
अपनी आँखें बंद करते हैं
तो
उनके सपनों में आती है
एक
बहुत बड़ी बिल्ली
जो
उस अदृश्य जेब में छुपे चूहे को
खा
जाती है |
यह
बिल्ली आत्म-निर्भर है
जिसने
छोटे-बड़े,खतरनाक
हर
तरह के चूहों को अपने दम पर निगला है |
उसका
कोई मालिक नही है
इसीलिए
उसके ऊपर इल्ज़ाम है कि
वह
वफादार नही है |
बिल्ली
की नज़र मे वफा
अगर
बराबरी के स्तर पर हो
तभी
उसका मूल्य है
नहीं
तो मालिक के प्रति वफाई का मतलब
साथियों
के साथ बेवफाई है |
ऐसे
में चूहों और कुत्तों ने
साठ-गाँठ
कर ली है
वे
सनकियों की तरह अँधेरे में
बिल्लियों
पर आक्रमण कर रहे हैं |
दर्जी
मियाँ का सपना अचानक टूट जाता है
इतने
में वो देखते हैं की अब सुबह हो गयी है
काम
पर जाते वक़्त दर्जी मियाँ
सपने
में देखी उस क्रांतिकारी मुठभेड़ का
यही
सबक दोहरातें रहते हैं कि वो
यह
सपना असल ज़िन्दगी में
बिल्ली
के हक में साकार करेंगे |
तकलीफ़ यूँ खुले आम ना लिखा करो,
ReplyDeleteतकलीफ़ की ज़द में जीने वालों के सबर टूट जाएँगे...।
😢😢
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