मुझे
तुम्हें जानते,समझते हुए
तुम्हारे
साथ बड़ा होना है
जैसे
पेड़ अपने वातावरण में
दूसरे
पेड़ों के साथ बड़ा होता है |
वह
किसी की छाया में रहकर
ज्यादा
बड़ा नहीं हो पाता
वह
बराबरी में रहकर अपने अनुरूप
उनके
अगल-बगल में बड़ा होता है |
‘वह किसी की छाया में रह कर नही बड़ा हो पाता..’
ReplyDeleteबढ़िया��������
🤗🤗
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