मुझे तुम्हें जानते,समझते हुए
तुम्हारे साथ बड़ा होना है
जैसे पेड़ अपने वातावरण में
दूसरे पेड़ों के साथ बड़ा होता है |
वह किसी की छाया में रहकर
ज्यादा बड़ा नहीं हो पाता
वह बराबरी में रहकर अपने अनुरूप
उनके अगल-बगल में बड़ा होता है |

Comments

  1. ‘वह किसी की छाया में रह कर नही बड़ा हो पाता..’
    बढ़िया��������

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