प्रेम अगर कोई गणितीय संख्या है
तो वह जरूर पाई होगा |
उसकी तरह ही irrational और chaotic
जीवन के हर पड़ाव में,हर घुमाव में
हर बारीक लोच में
वह छुपा हुआ सा रहेगा |
उसको ढूँढना,समझना ही
जीवन को समझना है |
इसका जितना ज्यादा विस्तार हमें ज्ञात होगा
उतनी ही सहूलियत हमें जीने में होगी |
प्रकृति अपने तत्वों से कैसे प्रेम करती है
इसको जानना
पाई को जानने जैसा है |


Comments

Post a Comment

Popular Posts