कुछ छोटी कविताएँ
(१)
जब हम किसी रिश्ते में खपने लगते हैं
वह प्यार नही रह जाता,व्यापार हो जाता है
एक दिन बही खाता खुलता है और हिसाब हो जाता है |
(२)
मेरी ज़िन्दगी नदी के उस पार पड़े तड़प रही थी
न मुझे तैरना आता था न मेरे पास नाव थी |
(३)
एक समय की कैद में है ज़िन्दगी
और ज़िन्दगी में एक समय कैद है |
(४ )
अतीत के आईने में जब वर्तमान देखा तो भविष्य नज़र आया
बार-बार देखा तो और साफ़ नज़र आया |
(५ )
जब नदी थक हार कर अपनी प्यास बुझाने समंदर में उतरती है
तो उसकी तरह शांत हो जाती है |
(६)
दिल में उतरो तो डूबने के इरादे से वर्ना
तैरने वाले तो सतह पर तैर के निकल जाते हैं |
(७)
आईने में अपना चेहरा तब तक देखो
जब लगने लगे खुद को पहचानने लगे हो तुम
और आईने में अपना चेहरा तभी तक देखो
जब लगने लगे खुद को जानने लगे हो तुम |
(८ )
जब तक मुझे यह एहसास होगा कि मेरा पहला और अंतिम दोस्त
मैं खुद था तब तक मेरा दोस्त मर गया होगा या मर रहा होगा |
(९ )
वो मेरे बगल में बैठी थी
अचानक नदी में कूद गयी
मैं भी कूद गया
उसने कहा मुझे एक बात कहनी थी
मैंने कहा मुझे भी
दोनों साथ बोल पड़े
मुझे मत बचाना
नदी इतनी भी गहरी नही थी
जितनी की यह बात और
पानी में रहते हुए हमने
एक दूसरे का गला दबा दिया |
(१० )
यूँही राह चलते नही मिला करते हमराही
हमराही मिलने के लिए अपनी राह का पता होना जरूरी है |
(१० )
यूँही राह चलते नही मिला करते हमराही
हमराही मिलने के लिए अपनी राह का पता होना जरूरी है |
Comments
Post a Comment