रात का भोजन
मेरे गाँव में
औरतें पूरे दिन का बचा खुचा खाती हैं
और मर्द स्वादिष्ट खाने के बाद
बची हुई औरतों को खा जाते हैं
इस तरह हर रोज़
औरत की थाली में होता है
बचा हुआ खाना और
मर्द के बिस्तर पर होती है
बची हुई औरत
एक दिन तंग आकर
अपना बचा खुचा खाना
घर की गाय गोरु की
नाद में छोड़कर
वो औरत मर्द की थाली में
खुद को परोस देती है
मर्द औरत की लाश को
ओढ़कर सो जाता है ।
अलसुबह घर की औरतों
का रुदन सुनकर जब
गाय गोरु नरियाते हैं
तो पूरे गाँव के मर्दों
को उनकी नाद में
पिछली रात का खाना
बचा देखकर
लगता है
कि उनके जानवर भूख
के मारे चिल्ला रहे हैं।
प्रशान्त
मेरे गाँव में
औरतें पूरे दिन का बचा खुचा खाती हैं
और मर्द स्वादिष्ट खाने के बाद
बची हुई औरतों को खा जाते हैं
इस तरह हर रोज़
औरत की थाली में होता है
बचा हुआ खाना और
मर्द के बिस्तर पर होती है
बची हुई औरत
एक दिन तंग आकर
अपना बचा खुचा खाना
घर की गाय गोरु की
नाद में छोड़कर
वो औरत मर्द की थाली में
खुद को परोस देती है
मर्द औरत की लाश को
ओढ़कर सो जाता है ।
अलसुबह घर की औरतों
का रुदन सुनकर जब
गाय गोरु नरियाते हैं
तो पूरे गाँव के मर्दों
को उनकी नाद में
पिछली रात का खाना
बचा देखकर
लगता है
कि उनके जानवर भूख
के मारे चिल्ला रहे हैं।
प्रशान्त
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