दिल दरिया है
और प्यार....
उसमें तैरती हुई
मछली सी
एक गुदगुदी सी
बेवजह चेहरे पर
मुस्कान सी
(2)
प्यार ईंधन है
और हम ढिबरी
भभक-भभक कर
हम जलते रहते हैं।
और प्यार....
उसमें तैरती हुई
मछली सी
एक गुदगुदी सी
बेवजह चेहरे पर
मुस्कान सी
(2)
प्यार ईंधन है
और हम ढिबरी
भभक-भभक कर
हम जलते रहते हैं।
Comments
Post a Comment