( १ )
मेरे
कमरे की दीवार के दूसरी तरफ
एक
खुशहाल दम्पति रहता है
ऐसा
मोहल्ले वालों का मानना है |
वे
रोज मुझे बातें करते हुए सुनाई देते हैं
एक
ऊँची मर्दाना आवाज़ में
एक दबी
ज़नाना आवाज़ में
( २ )
मुझे
उनकी भाषा की समझ नहीं
पता
नहीं कि क्या बातें करते हैं !
मैंने
कभी दीवारों पर कान लगाकर
सुनने-समझने
की कोशिश भी नहीं की
उनका
व्यक्तिगत मामला समझकर |
( ३ )
एक
दिन मुझे उस स्त्री की चीखें सुनाई दी
मैं
धीरे-धीरे समझने लगा कि वे क्या बातें करते हैं
क्योंकि
चीखों की भाषा नहीं होती
या
एक ही भाषा होती है |
( ४ )
मुझे
एहसास हुआ कि यह उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है
उस
स्त्री के लिए तो बिलकुल नहीं !
मैं
उस स्त्री से मिलना चाहता था
पर
मुझे नहीं पता था कि हमारे बीच
महज़
एक दीवार का फासला नहीं है
ऐसी
ही अनगिनत दीवारें हैं
वो
भी अदृश्य !
( ५ )
एक
दिन,न उसकी दबी आवाज़ सुनाई दी,न उसकी चीख
उसके
इसी मौन ने मुझे बहरा कर दिया
और
मुझे लगा –
उसकी
चीखों से लेकर उसके मौन तक
उसके
जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक
उसका
जीवन उसका नहीं था |
उसका
कुछ भी नहीं था !
उस
स्त्री की मुक्त छवि जो मेरे लिए कमोबेश अज्ञात थी
मेरी
आँखों के सामने तैरने लगी |
( ६ )
ऑंखें
बंद !
अब
साफ-साफ दिखता है
दुखता
है मन,काँपता है ह्रदय
जलता
है-
एक
घर
एक
बच्ची
एक
स्त्री
साड़ी
में लिपटी
और
राख उड़ जाती है
तेज़
हवा के साथ
आँखें
बंद करने से डर लगता है !
माँ
मुझे शिकायत है तुमसे
तुमने
सब कुछ सिखाया
आँखें
खोलकर सोना तो सिखाया ही नहीं !
❤️
ReplyDeleteThank you
ReplyDeleteVery emotional
ReplyDeleteThank you
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