मैंने दूसरों को खुश रखने के लिए बहुत से झूठ बोले हैं
उसमे से सबसे बड़ा झूठ यह की मैं झूठ नहीं बोलता
जब कभी मेरे किसी करीबी की बात मुझे बहुत चुभ भी जाए
तो मैं हँस के नज़रन्दाज कर देने का नाटक करता हूँ
इस दौरान मुझे नहीं पता होता की मैं सही कर रहा हूँ या गलत
पर तुम्हारा मेरी झूठी बातों से खुश होना और
तुम्हारी बातों की चुभन इकट्ठा होते रहते हैं
अक्सर होता है की चुभन की ईमारत ज्यादा ऊँची हो जाती है
और गिरती है सीधा मेरे दिल पर
दिल तड़पता हुआ दिमाग से अपने अंतिम शब्द कहता है

कि अपने इतने करीबी से झूठ मत बोला करो |

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