मेरे
शब्दों से उसका अर्थ टपकता
ओस
की बूँद की तरह
ठंडा-ठंडा
गिरता सतह पर और बिखर जाता
शब्दों
का गिर के अर्थों में बिखर जाना स्वतः स्फूर्त प्रक्रिया है
एन्ट्रापी
ड्रिवेन
मुझे
कभी कभी बिखरे हुए अर्थों को जब कभी समेटकर शब्दों में ढालना होता है
तो
यह बहुत सचेत प्रयास होता है
कभी
कभी उर्जा के हेर-फेर से
अनचाहे
शब्द भी बन जाते हैं
और
ऐसे शब्द स्टेबल नहीं होते
और
निर्माण प्रक्रिया के दौरान ही
टूट
के बिखर जाते हैं
अगला
प्रयास मेरा और भी जटिल होता है
यही
प्रक्रिया चलती रहती है
जब तक शब्द अपनी एनर्जी स्टेट में पहुँच नहीं जाता
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