गुरूजी
आज ‘स्त्री विमर्श’ पर जोरदार भाषण देकर घर पहुंचे हैं
अपने
भीमकाय सोफा पर पसर कर चिल्लातें हैं – पानी
पानी
थोड़ा देर से लाने पर ‘अर्धांगिनी’ को जड़ देते है कंटाप
सारा
‘स्त्री विमर्श’ कांच के गिलास की तरह ही टूटकर जमीन पर फ़ैल जाता है |
कुछ
देर बाद जब पता चलता है
उनकी
बेटी ‘सरस्वती’ भाग गयी है घर से
किसी
अन्य जाति के लड़के के साथ
इतने
में गुरूजी अपनी बेटी के चरित्र को परिभाषित करने लगते है और जड़ देतें हैं
‘अर्धांगिनी’ को दूसरा कंटाप
यह
कहते हुए कि तुम एक लड़की को कंट्रोल नहीं कर सकी |
चिल्लाते-चिल्लाते
गुरूजी खो देते हैं अपना कंट्रोल
गुरूजी
अनवरत चिल्लाते रहते हैं – रंडी,कुतिया,साली |
भीड़
उनके घर के बाहर
बड़ी
ही इत्मिनान से सुन रही है
गुरूजी
का ‘घरेलू मसला’ और
उनका
कोई ‘शुभचिंतक’ यूट्युब पर अपलोड कर देता हैं उनका
‘लाइव
फेमिनिस्म’ |
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