मैं
इंतज़ार कर रहा हूँ कि वे कब ‘सोचने’ को नशा करार देकर अवैध घोषित करेंगे
पर
यह सब करने से पहले ही उन्होंने खोल दिए हैं रिहैबिलिटेशन सेंटर
ये
सब फ़ैल गए हैं विद्यालयों,डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नाम
पर
जहाँ
विकसित की जाती है ‘सोच’ को ख़तम करने की ‘सोच’
यह
कहना गलत न होगा कि उन्होंने
नयी
सोच को ख़त्म करने के लिए
एक
ही तरह की सोच को वायरस की भांति चहुँओर फैला दिया है -
जिसके
संक्रमण से मनुष्यों का अमानवीकरण होता है
पर
मुझ पर या मुझ जैसों पर इसका कोई असर नहीं होगा
क्योंकि
मैं बहुत बड़ा नशाखोर हूँ
हाँ
मैं करता हूँ सोचने का नशा
इसलिए
मुझे पता है कि इसको ख़त्म करने वाली
सोच
कैसे बनती है और कैसे काम करती है |
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