उम्मीदों का
एफिल टावर
मुझे
तलाश है उसकी...
न जाने
कौन है?
किधर जा रहा
है ?
पर,
कुछ सुबूत
मिले हैं
जैसे....
दलदल में
क़दमों के निशान
वातावरण का वह
दायरा
जहां उसके
होने की उम्मीद है
हर एक पल उसे
पाने की ख़ुशी
और खो देने का
गम है
एक अजीब सा
मिश्रित अनुभव है
थक गया हूँ
दया कर दे
मेरी कोशिशों
की इज्ज़त कर ले
इसी उम्मीद
में
मैं रुक जाता
हूँ
जम जाता हूँ
उन् काली
यादों के साये के बीच
उस घने जंगल
में
जहां अब बस
खूंखार आवाजें हैं
डर गया
हूँ,सहम गया मैं
पर अब मुझे
ढूँढने वाला कोई नहीं है
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