अनंत परतों से आच्छादित मेरी ज़िन्दगी में 
एक परत मेरे माँ -पिता के लिए है
एक भाई -बहनों के लिए
एक बचे हुए रिश्तेदारों के लिए
और कई अनजान परतें है -
अनजान लोगों के लिए
मेरे लिए भी एक परत है
पेनलटीमेट परत जो अनजान परतों में से ही एक  है
पर मेरी वास्तविक परत जो मैंने
खुद के लिए बनायीं थी
उसे  अब मै भी भूल चुका था
मै बहुत लोगों से मिला
जिन्होंने कहा मुझे ये परत दिखाया करो
और कोई नहीं
मै इन झूठी परतों से बोझिल हो गया
जिसकी वजह से मेरी भीतरी परते घिसती गई
और मै खुद समय का फलन बन गया
हर पल बाद एक नई परत का निर्माण
और एक पुरानी परत का क्षय
जो हमेशा एक प्रश्न खड़ा करती है
खुद से मेरा सरोकार

मै खुद नहीं चाहता या ....लोग ?

नोट---पेनलटीमेट--अंतिम से दूसरी



------prashant singh

Comments

Popular Posts