चेहरे
बदलतें हैं
चेहरा देखकर
कल रात मैंने
उसे देखा था
शायद
.......
सुबह भी ..पर
देर से समझ
में आया
व्यक्तित्व का
वह भीषण
अंतर्द्वन्द्व
जब उसने कंधे
पर हाथ रखा था
पर....कब वह गले तक पंहुचा
एक बारगी तो
शक हुआ
क्या वह
वही था?
मगर... उसकी आवाज ने
जो पुख्ता
सुबूत दिया
सब याद आ गया
क्योंकि
.....
इन्ही
प्रश्नों के भवर में मैं भूला था
की,
मेरी भी होती
है
रोज
प्लास्टिक
सर्जरी
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