भाग्यवादियो के लिए
जिन्दगी की किताबों मे
पन्ने कई हैं मगर
कोरे,स्याहीहीन
सफेद से
प्लास्टिक जैसे
अविनाशी-अनबायोडिग्रेडिबल
जो कभी न मिटे
पर----
उस पर सब कुछ मिट जाए
बचे रह जाए
तो बस लहू के रन्ग
जो लिखा जाए रक्तरंजित
हाथों से
क्या करे?
मेरी सोच मे मेरी कितनी सोच है
सब अज्ञात
अवयव है किसी सामान्गी मिश्रण का
पृथक्करण नामुमकिन सा
परीक्षण पश्चात--
वह कई जटिल सोचों का है मिश्रण
जो भुलाकर,भ्रम पैदाकर
एहसास कराती है कि--
मेरी सोच केवल मेरी ही सोच है
------प्रशान्त
जिन्दगी की किताबों मे
पन्ने कई हैं मगर
कोरे,स्याहीहीन
सफेद से
प्लास्टिक जैसे
अविनाशी-अनबायोडिग्रेडिबल
जो कभी न मिटे
पर----
उस पर सब कुछ मिट जाए
बचे रह जाए
तो बस लहू के रन्ग
जो लिखा जाए रक्तरंजित
हाथों से
क्या करे?
मेरी सोच मे मेरी कितनी सोच है
सब अज्ञात
अवयव है किसी सामान्गी मिश्रण का
पृथक्करण नामुमकिन सा
परीक्षण पश्चात--
वह कई जटिल सोचों का है मिश्रण
जो भुलाकर,भ्रम पैदाकर
एहसास कराती है कि--
मेरी सोच केवल मेरी ही सोच है
------प्रशान्त
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